तारीख़वार वाक़िआत
नोट: (ब) – बेसत के साल, (ई) – ईसवी साल, (हि) – हिजरी साल ज़ाहिर करता है।
ई. 570 हज़रत अब्दुल्लाह और हज़रत आमिना का निकाह। हमारे प्यारे नबी के मुबारक नूर का आपकी वालिदा में मुंतक़िल होना (जुमादल ऊला / जुलाई)। ख़ुशहाली का साल। रसूलुल्लाह के वालिद हज़रत अब्दुल्लाह का इंतिक़ाल (रजब / सितंबर)।
571 हाथी का वाक़िआ (मुहर्रम / फ़रवरी)। कायनात के सुल्तान मुहम्मद अलैहिस्सलाम की पैदाइश (12 रबीउल अव्वल, पीर / 20 अप्रैल; हिजरत से 53 (शम्सी हिसाब से 51) साल पहले, हाथी के वाक़िए के 55 दिन बाद)। दूध पिलाने वाली माँ हलीमा के सुपुर्द किया जाना (रबीउल आख़िर)।
573 हज़रत अबू बकर (रज़ियल्लाहु अन्हु) की पैदाइश।
576 दूध पिलाने वाली माँ का आपको मक्का लाकर आपकी वालिदा आमिना के सुपुर्द करना।
577 हमारे प्यारे नबी की वालिदा आमिना का अबवा में इंतिक़ाल। उम्मे ऐमन का रसूलुल्लाह को मक्का में आपके दादा अब्दुल मुत्तलिब के सुपुर्द करना। हज़रत उस्मान (रज़ियल्लाहु अन्हु) की पैदाइश।
579 दादा अब्दुल मुत्तलिब का इंतिक़ाल और आपका चचा अबू तालिब को सौंपा जाना।
583 चचा अबू तालिब के साथ शाम के तिजारती क़ाफ़िले में सफ़र पर निकलना और बुसरा से लौट आना। हज़रत उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) की पैदाइश।
588 चचा ज़ुबैर के साथ यमन जाना।
591 हज़रत अबू बकर के साथ शाम जाना। रसूलुल्लाह का हिल्फ़ुल फ़ुज़ूल अंजुमन में शामिल होना।
595 हज़रत ख़दीजा के तिजारती क़ाफ़िले के साथ बुसरा शहर जाना।
596 हज़रत ख़दीजा से निकाह।
599 हज़रत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) की पैदाइश।
600 क़ुस इब्ने साइदा का उकाज़ के मेले में एक ख़ुत्बा पढ़ना, जिसमें उन्होंने रसूलुल्लाह की नुबुव्वत की ख़ुशख़बरी दी।
605 काबा की मरम्मत के दौरान हजर-ए-असवद को उसकी जगह रखने के लिए आपका पंच (फ़ैसला करने वाला) बनना।
ब.1/610 बेसत: 40 साल की उम्र में आपको नुबुव्वत की ख़बर दी जाना (17 रमज़ान, पीर)। हिरा पहाड़ (जबल-ए-नूर) के ग़ार में पहली वह्य (सूरह अलक़ की पहली पाँच आयतों का नाज़िल होना) (रमज़ान / अगस्त)।
2/611 वह्य के कुछ अरसा रुक जाने पर नबी-ए-करीम का जिबराईल अलैहिस्सलाम को देखने की आरज़ू में बार-बार हिरा पहाड़ के ग़ार में जाना। इसराफ़ील अलैहिस्सलाम का आकर आपको कुछ बातें सिखाना।
3/612 पहले मुसलमान: हज़रत ख़दीजा, अबू बकर सिद्दीक़, अली इब्ने अबी तालिब, ज़ैद इब्ने हारिसा (और उनकी बीवी उम्मे ऐमन), उस्मान इब्ने अफ़्फ़ान, तल्हा इब्ने उबैदुल्लाह, ज़ुबैर इब्ने अव्वाम, अब्दुर रहमान इब्ने औफ़, साद इब्ने अबी वक़्क़ास।
4/613 रसूलुल्लाह का क़रीबी रिश्तेदारों से शुरू करके लोगों को इस्लाम की दावत देना। मुशरिकों का मुसलमानों को सताना और उन पर ज़ुल्म-ओ-सितम शुरू करना। पहले शहीद: हज़रत यासिर, उनके बेटे हज़रत अब्दुल्लाह और उनकी बीवी हज़रत सुमय्या। हज़रत आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) की पैदाइश।
5/614 हब्शा की तरफ़ पहली हिजरत (रजब / मई)। मुहाजिरों का हब्शा से मक्का लौटना (शव्वाल / जुलाई)।
6/615 हज़रत हमज़ा का मुसलमान होना। हज़रत उमर का मुसलमान होना। हब्शा की तरफ़ दूसरी हिजरत। रसूलुल्लाह और मुसलमानों का दारुल अरक़म से निकलना।
7/616 मुहासरे (घेराबंदी) का शुरू होना (मुहर्रम)।
8/617 हज़रत उस्मान और उनकी बीवी हज़रत रुक़य्या का हब्शा से लौटना।
9/618 शक़्क़ुल क़मर का मोजिज़ा: रसूलुल्लाह के इशारे से चाँद का दो टुकड़े होना।
10/619 मुहासरे का ख़त्म होना।
10/620 अबू तालिब का इंतिक़ाल (7 रमज़ान / अप्रैल)। हमारी माँ हज़रत ख़दीजा का इंतिक़ाल (10 रमज़ान / अप्रैल)। रसूलुल्लाह का हज़रत सौदा बिन्ते ज़मआ से निकाह (रमज़ान / मई)। रसूलुल्लाह का ज़ैद इब्ने हारिसा के साथ ताइफ़ जाना (शव्वाल / मई)। नसीबीन के जिन्नात का इस्लाम क़बूल करना। रसूलुल्लाह का ताइफ़ से मक्का लौटना (23 ज़िलक़ादा)। अक़बा की मुलाक़ात (10 ज़िलहिज्जा / 17 जुलाई)।
11/621 मेराज का मोजिज़ा और पाँच वक़्त की नमाज़ का फ़र्ज़ होना (27 रजब)। जिबराईल अलैहिस्सलाम का काबा शरीफ़ के दरवाज़े के पास दो दिन रसूलुल्लाह की इमामत करना। (मेराज की तारीख़ के बारे में दूसरी रिवायतें भी हैं। मेराज कई बार हुई। उनमें से एक जागते हुए और मुबारक जिस्म के साथ थी। बाक़ी सिर्फ़ मुबारक रूह के साथ थीं।)
रसूलुल्लाह का हज़रत आइशा से निकाह पढ़ा जाना (शव्वाल)। अक़बा की पहली बैअत (10 ज़िलहिज्जा / 6 जुलाई, पीर)। रसूलुल्लाह का इस्लाम सिखाने के लिए मुसअब इब्ने उमैर को मदीना भेजना।
12/622 सनतुस सुरूर (ख़ुशी का साल): मदीना वालों में से ज़्यादातर का इस्लाम क़बूल करना। अक़बा की दूसरी बैअत (12 ज़िलहिज्जा / 28 जून, पीर)।
13/1/622 बेसत का 13वाँ, हिजरत का पहला और ईसवी 622वाँ साल। हिजरी साल: मुसलमानों के हिजरी क़मरी साल की शुरुआत (1 मुहर्रम / 16 जुलाई)। सनतुल इज़्न: मुसलमानों को मक्का से मदीना हिजरत करने की इजाज़त मिलना। मुशरिकों का दारुन नदवा में जमा होकर रसूलुल्लाह को क़त्ल करने का फ़ैसला करना (25 सफ़र / 8 सितंबर)। हिजरत: रसूलुल्लाह का हज़रत अबू बकर के साथ ग़ार-ए-सौर की तरफ़ रवाना होना (26 सफ़र, जुमेरात / 9 सितंबर)। सौर पहाड़ के ग़ार से मदीना की तरफ़ सफ़र पर निकलना (1 रबीउल अव्वल, पीर / 13 सितंबर)। क़ुबा बस्ती पहुँचना (8 रबीउल अव्वल, पीर / 20 सितंबर)। मस्जिद-ए-क़ुबा की तामीर (8–11 रबीउल अव्वल / 20–23 सितंबर)। रसूलुल्लाह का क़ुबा और मदीना के दरमियान रानूना वादी की नमाज़गाह में पहली जुमा की नमाज़ पढ़ाना (12 रबीउल अव्वल, जुमा / 24 सितंबर)। मदीना पहुँचना (12 रबीउल अव्वल, जुमा / 24 सितंबर)। अबू अय्यूब अन्सारी के घर मेहमान होना। मस्जिद-ए-नबवी की तामीर शुरू होना (रबीउल अव्वल / सितंबर)। घर वालों का मदीना आना। अज़ान-ए-मुहम्मदी का दिन में पाँच वक़्त दी जाने लगना। सलमान फ़ारसी का मुसलमान होना।
हि.1/623 मुहाजिरों और अन्सार के दरमियान भाईचारा क़ायम किया जाना। पहला लिखित मुआहदा: मदीना का दस्तावेज़ और मदीना की वादी को हरम (मुक़द्दस इलाक़ा) क़रार देना (रमज़ान / मार्च)। जंग की इजाज़त मिलना। पहला सरिय्या: हज़रत हमज़ा का ईस / सीफ़ुल बहर वाला सरिय्या (रमज़ान / मार्च)। मस्जिद-ए-नबवी की तामीर का पूरा होना (शव्वाल / अप्रैल)। मस्जिद-ए-नबवी में सुफ़्फ़ा का क़ायम होना। मदीना में बाज़ार और मंडी क़ायम होना। मुसलमानों की पहली मर्दुमशुमारी। उबैदा इब्ने हारिस का राबिग़ का सफ़र (शव्वाल / अप्रैल)।
साद इब्ने अबी वक़्क़ास का ख़र्रार वाला सरिय्या (ज़िलक़ादा / मई)। असअद इब्ने ज़ुरारा, बरा इब्ने मारूर और कुलसूम इब्ने हिद्म का इंतिक़ाल। उस्मान इब्ने मज़ऊन का इंतिक़ाल और जन्नतुल बक़ी का क़ब्रिस्तान के लिए मख़सूस किया जाना (ज़िलहिज्जा / जून)।
2/623 रसूलुल्लाह का पहली बार आशूरा के दिन रोज़ा रखना (10 मुहर्रम / 14 जुलाई)। पहला ग़ज़वा: अबवा (वद्दान) का ग़ज़वा (12 सफ़र / 15 अगस्त)। बुवात का ग़ज़वा (1 रबीउल अव्वल / 2 सितंबर)। पहले बद्र (सफ़वान) का ग़ज़वा (रबीउल अव्वल / सितंबर)। ज़ुल उशैरा का ग़ज़वा (1 जुमादल ऊला / 31 अक्टूबर)।
2/624 अब्दुल्लाह इब्ने जह्श का बत्न-ए-नख़्ला वाला सरिय्या (20 रजब / 17 जनवरी)। हज़रत अली और हज़रत फ़ातिमा का निकाह पढ़ा जाना (रजब / जनवरी)। क़िब्ले का मस्जिद-ए-अक़्सा से मस्जिद-ए-हराम / काबा की तरफ़ फेरा जाना (11 शाबान, मंगल / 7 फ़रवरी)। रोज़े का फ़र्ज़ होना (शाबान / फ़रवरी)। तरावीह की नमाज़ पढ़ी जाने लगना (1 रमज़ान / 26 फ़रवरी)। हब्शा में मौजूद सहाबा में से 33 और लोगों का बद्र से पहले मक्का लौटना। उनमें से 2 का मक्का मुकर्रमा में इंतिक़ाल हुआ, 7 को मुशरिकों ने क़ैद कर लिया, 24 मदीना मुनव्वरा पहुँचकर बद्र के ग़ज़वे में शरीक हुए। बद्र का ग़ज़वा (17 रमज़ान / 13 मार्च)। अबू जहल का मारा जाना। रसूलुल्लाह की बेटी हज़रत रुक़य्या का इंतिक़ाल (रमज़ान / मार्च)। ज़कात का फ़र्ज़ होना (रमज़ान / मार्च)। सदक़ा-ए-फ़ित्र का हुक्म दिया जाना (रमज़ान / मार्च)। पहली ईदुल फ़ित्र और ईद की नमाज़ (1 शव्वाल / 27 मार्च)। रसूलुल्लाह और हज़रत आइशा की शादी (शव्वाल / अप्रैल)। मक्का से मदीना आते हुए हज़रत ज़ैनब पर हमला किया जाना (शव्वाल की शुरुआत / मार्च)। क़रक़रतुल कुद्र का ग़ज़वा (5 शव्वाल / 31 मार्च)। बनू क़ैनुक़ा का ग़ज़वा (15 शव्वाल / 10 अप्रैल)। सवीक़ का ग़ज़वा (5 ज़िलहिज्जा / 29 मई)। हज़रत अली और हज़रत फ़ातिमा की शादी (ज़िलहिज्जा / मई)। पहली ईदुल अज़हा का आना (10 ज़िलहिज्जा / 3 जून)।
3/624 कअब इब्ने अशरफ़ का मारा जाना (4 रबीउल अव्वल / 25 अगस्त)। अनमार (ग़तफ़ान, ज़ी अम्र) का ग़ज़वा (12 रबीउल अव्वल / 2 सितंबर)। बहरान (नजरान) का ग़ज़वा (6 जुमादल ऊला / 25 अक्टूबर)। हज़रत उस्मान का हज़रत उम्मे कुलसूम से निकाह (जुमादल आख़िरा)।
3/625 रसूलुल्लाह का हज़रत हफ़्सा से निकाह (शाबान / जनवरी)। हज़रत हसन की पैदाइश (15 रमज़ान / 1 मार्च)। रसूलुल्लाह का हज़रत ज़ैनब बिन्ते ख़ुज़ैमा से निकाह (रमज़ान)।
उहुद का ग़ज़वा (7 शव्वाल, शनिवार / 23 मार्च)। हमराउल असद का ग़ज़वा (16 शव्वाल / 1 अप्रैल)।
4/625 अब्दुल्लाह इब्ने उनैस का ख़ालिद इब्ने सुफ़यान को क़त्ल करना (5 मुहर्रम / 17 जून)। रजीअ का वाक़िआ (सफ़र / जुलाई)। बीर-ए-मऊना का वाक़िआ (19 सफ़र / 31 जुलाई)। बनू नज़ीर का ग़ज़वा (रबीउल अव्वल / अगस्त)। शराब का कुछ हद तक हराम किया जाना (रबीउल अव्वल / अगस्त–सितंबर)। हमारी माँ हज़रत ज़ैनब बिन्ते ख़ुज़ैमा का इंतिक़ाल (रबीउल आख़िर / सितंबर)। हज़रत उस्मान और हज़रत रुक़य्या के बेटे अब्दुल्लाह का इंतिक़ाल (जुमादल ऊला / अक्टूबर)। अबू सलमा का इंतिक़ाल (23 जुमादल आख़िरा / 30 नवंबर)।
4/626 हज़रत हुसैन की पैदाइश (5 शाबान / 10 जनवरी)। रसूलुल्लाह का हज़रत उम्मे सलमा से निकाह (शव्वाल का आख़िर / अप्रैल की शुरुआत)। फ़ातिमा बिन्ते असद का इंतिक़ाल। छोटी बद्र का ग़ज़वा (1 ज़िलक़ादा / 4 अप्रैल)।
5/626 ज़ातुर रिक़ा का ग़ज़वा (10 मुहर्रम / 11 जून)। दूमतुल जंदल का ग़ज़वा (25 रबीउल अव्वल / 24 अगस्त)। मुसलमान हो चुके बनू मुज़ैना के वफ़्द का मदीना आना (रजब / दिसंबर)। मुरैसी (बनू मुस्तलिक़) का ग़ज़वा (2 शाबान / 27 दिसंबर)। हज़रत आइशा पर तोहमत लगाई जाना। तयम्मुम की आयत का नाज़िल होना।
5/627 रसूलुल्लाह का हज़रत जुवैरिया बिन्ते हारिस से निकाह (शाबान)। ख़न्दक़ (अहज़ाब) का ग़ज़वा (शव्वाल / मार्च)। बनू क़ुरैज़ा का ग़ज़वा (23 ज़िलक़ादा / 15 अप्रैल)। रसूलुल्लाह का हज़रत ज़ैनब बिन्ते जह्श से निकाह (1 ज़िलक़ादा / 24 मार्च)। रसूलुल्लाह का हज़रत रैहाना बिन्ते अम्र से निकाह (ज़िलहिज्जा / अप्रैल–मई)।
6/627 मुहम्मद इब्ने मस्लमा का क़ुरता वाला सरिय्या (10 मुहर्रम / 1 जून)। हज़रत अली का बनू साद इब्ने फ़दक वाला सरिय्या। ग़ाबा (ज़ी क़रद) का ग़ज़वा (2 रबीउल अव्वल / 22 जुलाई)। ग़म्र का सरिय्या (रबीउल अव्वल)। मुहम्मद इब्ने मस्लमा का ज़ुल क़स्सा वाला सरिय्या (रबीउल अव्वल)। अबू उबैदा इब्ने जर्राह का ज़ुल क़स्सा वाला सरिय्या (रबीउल आख़िर / सितंबर)। ज़ैद इब्ने हारिसा का जमूम वाला सरिय्या (रबीउल आख़िर)।
बनू लिह्यान का ग़ज़वा (1 जुमादल ऊला / 18 सितंबर)। ज़ैद इब्ने हारिसा का ईस की तरफ़ टोह लेने वाला सरिय्या (जुमादल ऊला)। अबुल आस का मुसलमान होना। ज़ैद इब्ने हारिसा का तरफ़ वाला सरिय्या (जुमादल आख़िरा / अक्टूबर–नवंबर)। ज़ैद इब्ने हारिसा का वादिल क़ुरा वाला सरिय्या (रजब / नवंबर–दिसंबर)। ज़ैद इब्ने हारिसा का शाम का सफ़र / तिजारती क़ाफ़िला (रजब)। अब्दुर रहमान इब्ने औफ़ का दूमतुल जंदल वाला सरिय्या (शाबान / दिसंबर)। ज़ैद इब्ने हारिसा का मदयन वाला सरिय्या (शाबान / दिसंबर)। हज़रत अली का फ़दक वाला सरिय्या (शाबान / दिसंबर)।
6/628 ज़ैद इब्ने हारिसा का उम्मे क़िरफ़ा वाला सरिय्या (रमज़ान / जनवरी)। मदीना में सूखा पड़ना / बारिश की दुआ के लिए निकलना (रमज़ान)। अब्दुल्लाह इब्ने अतीक का अबू राफ़े वाला सरिय्या (रमज़ान / जनवरी)। अब्दुल्लाह इब्ने रवाहा का ख़ैबर की तरफ़ टोह लेने वाला सरिय्या (रमज़ान / फ़रवरी)। अब्दुल्लाह इब्ने रवाहा का उसैर इब्ने ज़ारिम वाला सरिय्या (शव्वाल / फ़रवरी)। कुर्ज़ इब्ने जाबिर फ़िहरी का सरिय्या (ज़िलक़ादा / मार्च)। उमरे का सफ़र (2 ज़िलक़ादा / 14 मार्च)। बैअत-ए-रिज़वान (ज़िलक़ादा / मार्च–अप्रैल)। सुलह-ए-हुदैबिया (ज़िलहिज्जा / अप्रैल)। सूरह फ़तह का नाज़िल होना। बनू ख़ुज़ाआ, बनू असलम और बनू ख़ुशनी के वफ़्दों का मदीना आकर मुसलमान होना। शराब का क़तई तौर पर हराम किया जाना। रसूलुल्लाह का ऊँट और घोड़े की दौड़ की इजाज़त देना।
6, 7/628 रसूलुल्लाह का इस्लाम की दावत के ख़त भेजना (ज़िलहिज्जा के आख़िरी दिन – मुहर्रम की शुरुआत / मई)।
7/628 ज़ैद इब्ने हारिसा का हिस्मा वाला सरिय्या (जुमादल आख़िरा)। हब्शा के नज्जाशी असहमा का मुसलमान होना। हज़रत उम्मे हबीबा का निकाह पढ़ा जाना। मिस्र के मुक़ौक़िस का मारिया को रसूलुल्लाह के पास भेजना। हमारी माँ हज़रत आइशा की वालिदा उम्मे रूमान (रज़ियल्लाहु अन्हा) का इंतिक़ाल। अबुल आस का मुसलमान होना और रसूलुल्लाह की बेटी ज़ैनब से उनका दोबारा निकाह (मुहर्रम / मई)। ख़ैबर का ग़ज़वा (मुहर्रम का आख़िर – सफ़र / जून)। ज़ैनब बिन्ते हारिस की रसूलुल्लाह को ज़हर देने की कोशिश। हब्शा की तरफ़ हिजरत कर चुके सहाबा में से बाक़ी लोगों का भी मदीना लौटना (सफ़र)। अशअरियों का मदीना आकर सहाबा-ए-किराम में शामिल होने का शरफ़ पाना।
लैलतुत तारीस: रसूलुल्लाह का अपने सहाबा के साथ सो जाना और फ़ज्र की नमाज़ के लिए न उठ पाना। रसूलुल्लाह और हज़रत उम्मे हबीबा की शादी। रसूलुल्लाह की दूध पिलाने वाली माँ सुवैबा का इंतिक़ाल। यमन के हाकिम बाज़ान का मुसलमान होना (जुमादल ऊला / सितंबर)। हज़रत अली की अस्र की नमाज़ के लिए सूरज के उफ़क़ से लौट आने का मोजिज़ा। वादिल क़ुरा का ग़ज़वा (जुमादल आख़िरा / अक्टूबर)। रसूलुल्लाह का हज़रत सफ़िय्या बिन्ते हुयय से निकाह। हज़रत उमर का तुरबा वाला सरिय्या (शाबान / दिसंबर)। हज़रत अबू बकर का नज्द वाला सरिय्या (शाबान / दिसंबर)। बशीर इब्ने साद अन्सारी का फ़दक / मुर्रा वाला सरिय्या (शाबान / दिसंबर)।
7/629 ग़ालिब इब्ने अब्दुल्लाह लैसी का मैफ़आ वाला सरिय्या (रमज़ान / जनवरी)। बशीर इब्ने साद अन्सारी का जिनाब वाला सरिय्या (शव्वाल / फ़रवरी)। उमरतुल क़ज़ा का सफ़र (ज़िलक़ादा – ज़िलहिज्जा / मार्च)। रसूलुल्लाह का मैमूना बिन्ते हारिस से निकाह (ज़िलक़ादा / मार्च)।
8/629 रसूलुल्लाह की बेटी हज़रत ज़ैनब का इंतिक़ाल (सफ़र)। ख़ालिद इब्ने वलीद, अम्र इब्ने आस और उस्मान इब्ने तल्हा का मुसलमान होना (सफ़र)। ग़ालिब इब्ने अब्दुल्लाह का क़ुदैद वाला सरिय्या (सफ़र / जून)। ग़ालिब इब्ने अब्दुल्लाह का फ़दक वाला सरिय्या (सफ़र / जून)। मूता की जंग (जुमादल ऊला / सितंबर)। अम्र इब्ने आस का ज़ातुस सलासिल वाला सरिय्या (जुमादल आख़िरा / अक्टूबर)। क़ुरैश के सुलह-ए-हुदैबिया को तोड़ने पर अबू सुफ़यान की सुलह की कोशिश।
8/630 रसूलुल्लाह का मक्का की फ़तह के लिए रवाना होना (10 रमज़ान / 1 जनवरी)। मक्का की फ़तह (20 रमज़ान, जुमेरात / 11 जनवरी)। रसूलुल्लाह का अबवा में अपनी वालिदा हज़रत आमिना की क़ब्र की ज़ियारत करना। बुतों का तोड़ा जाना। हुनैन का ग़ज़वा (11 शव्वाल / 1 फ़रवरी)। रसूलुल्लाह की अपनी दूध-शरीक बहन शैमा से मुलाक़ात। ताइफ़ का ग़ज़वा (शव्वाल / फ़रवरी)। रसूलुल्लाह का जिअराना में हुनैन का माल-ए-ग़नीमत तक़सीम करना (5–18 ज़िलक़ादा / 24 फ़रवरी – 9 मार्च)। रसूलुल्लाह का उमरा करना (19 ज़िलक़ादा / 10 मार्च)। मस्जिद-ए-नबवी के लिए तीन सीढ़ियों वाला मिम्बर बनाया जाना। रसूलुल्लाह के बेटे इब्राहीम की पैदाइश (ज़िलहिज्जा)।
9/630 रसूलुल्लाह का कुछ क़बीलों की तरफ़ ज़कात वसूल करने वाले भेजना (मुहर्रम / अप्रैल–मई)। उयैना इब्ने हिस्न फ़ज़ारी का सरिय्या (मुहर्रम)। तबूक का ग़ज़वा (रजब / अक्टूबर)। ख़ालिद इब्ने वलीद का दूमतुल जंदल वाला सरिय्या (रजब)। रसूलुल्लाह का मुनाफ़िक़ों की मस्जिद-ए-ज़िरार को गिरवाना। हब्शा के बादशाह नज्जाशी असहमा का इंतिक़ाल (रजब / अक्टूबर)। हज़रत अबू बकर का रम्ल वाला सरिय्या (शाबान)। रसूलुल्लाह की बेटी हज़रत उम्मे कुलसूम का इंतिक़ाल (शाबान)। रसूलुल्लाह का हिरक़्ल को दूसरी बार इस्लाम की दावत का ख़त भेजना। सनतुल वुफ़ूद (वफ़्दों का साल)। कअब इब्ने ज़ुहैर का मुसलमान होना और रसूलुल्लाह का अपना ख़िरक़ा उन्हें तोहफ़े में देना।
9/631 मुनाफ़िक़ों के सरदार अब्दुल्लाह इब्ने उबई की मौत (ज़िलक़ादा)। हज का फ़र्ज़ होना। हज़रत अबू बकर का अमीर-ए-हज मुक़र्रर किया जाना (ज़िलक़ादा – ज़िलहिज्जा / फ़रवरी–मार्च)। हज़रत अली का भी सूरह बराअत के शुरुआती हिस्से की तबलीग़ के लिए मक्का भेजा जाना (ज़िलहिज्जा / मार्च)।
10/631 ख़ालिद इब्ने वलीद का बनू हारिस वाला सरिय्या (रबीउल अव्वल / जून)। हज़रत अली का यमन / मज़हिज वाला सरिय्या (रमज़ान / दिसंबर)। यमन के हाकिम बाज़ान का इंतिक़ाल। नज्जाशी की बहन के बेटे फ़ीरोज़ का मुसलमान होना। मुसैलमा कज़्ज़ाब का नुबुव्वत का दावा करना। रमज़ान के महीने में जिबराईल अलैहिस्सलाम का रसूलुल्लाह के सामने पूरा क़ुरआन-ए-करीम दो बार पढ़ना।
10/632 रसूलुल्लाह के बेटे इब्राहीम का इंतिक़ाल। हज्जतुल विदा: रसूलुल्लाह का हज के लिए मदीना से रवाना होना (25 ज़िलक़ादा / 22 फ़रवरी)। रसूलुल्लाह का ख़ुत्बा-ए-विदा इरशाद फ़रमाना (9 ज़िलहिज्जा / 7 मार्च)। तवाफ़-ए-विदा (14 ज़िलहिज्जा / 12 मार्च, जुमेरात)। हज़रत रैहाना बिन्ते अम्र का इंतिक़ाल।
11/632 उसामा इब्ने ज़ैद का शाम जाने वाले लश्कर का सिपहसालार मुक़र्रर किया जाना। रसूलुल्लाह के सिर में दर्द शुरू होना (26 सफ़र / 24 मई, इतवार)। रसूलुल्लाह के बुख़ार का तेज़ होना, हुम्मा (तेज़ बुख़ार) की बीमारी का शुरू होना (27 सफ़र / 25 मई, पीर)। नुबुव्वत का दावा करने वाले असवद अनसी का क़त्ल (8 रबीउल अव्वल / 4 जून, जुमेरात)। रसूलुल्लाह का हज़रत अबू बकर को इमामत पर मुक़र्रर करना (8 रबीउल अव्वल / 4 जून, इशा की नमाज़)।
रसूलुल्लाह का हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ की इक़्तिदा में अपनी आख़िरी नमाज़ अदा करना (12 रबीउल अव्वल, पीर, फ़ज्र की नमाज़)। रसूलुल्लाह की वफ़ात (12 रबीउल अव्वल / 8 जून, पीर, दोपहर से पहले)। हज़रत अबू बकर का ख़लीफ़ा चुना जाना (12 रबीउल अव्वल / 8 जून, पीर)। रसूलुल्लाह का मंगल को बुध से मिलाने वाली रात (बुध की रात) आधी रात को दफ़न किया जाना। उसामा इब्ने ज़ैद का मुरतदों की तरफ़ भेजा जाना (16 रबीउल अव्वल / 12 जून, जुमा)। उसामा इब्ने ज़ैद का फ़तह के साथ लौटना (26 रबीउल आख़िर / 22 जुलाई, बुध)।
मैं क्या हूँ और मेरे पास क्या है?
इस बाग़ में मेरे लिए न गुलाब है, न लाला है,
इस बाज़ार में न लेन-देन है, न पैसा है,
न क़ुदरत, न इख़्तियार, न माल, न मुल्क है,
न दर्द, न लज़्ज़त, न मरहम, न ज़ख़्म है।
काश इस दुनिया में जानता: मैं क्या हूँ, मेरे पास क्या है?
वुजूद – इलाही लुत्फ़, ज़िंदगी – करीम की रहमत!
मुँह – रहमान की अता, कलाम – क़दीम का फ़ज़्ल!
बदन – ख़ुदा की बनाई इमारत, रूह – इज़्ज़त से फूँकी हुई साँस,
ताक़त – क़ुदरत वाले का एहसान, एहसासात – हकीम के रखे हुए!
काश इस दुनिया में जानता: मैं क्या हूँ, मेरे पास क्या है?
इस दुनिया में हक़ीक़त में मेरी कोई चीज़ नहीं,
जो कुछ है, सब उसका है, उसके मुल्क में कोई शरीक नहीं।
दुनिया में आना-जाना भी मेरे हाथ में नहीं,
“यह मेरा है” कहने को भरोसे की कोई सनद नहीं।
काश इस दुनिया में जानता: मैं क्या हूँ, मेरे पास क्या है?
मेरा वुजूद बस एक ज़ाहिरी सूरत है, मेरी रूह एक अमानत है,
“मैं” कहना भी उसके सामने बहुत बुरा शिर्क है,
बंदे पर जो फ़र्ज़ है, वह मालिक की इताअत है,
मुझे “मेरा बंदा!” कहना उसका लुत्फ़ और इनायत है।
काश इस दुनिया में जानता: मैं क्या हूँ, मेरे पास क्या है?
मैं फ़क़ीर और मोहताज हूँ, बेनियाज़ी और एहसान हक़ का है,
“अदम” मेरी पूँजी है, वुजूद और ज़िंदगी हक़ की है,
अज़ल और अबद, और क़हर और ग़लबा भी हक़ का है,
दुनिया और उक़बा में जो कुछ दिखता है, हक़ का है।
काश इस दुनिया में जानता: मैं क्या हूँ, मेरे पास क्या है?
खाना, पीना, लज़्ज़तें – उसकी सिफ़त रज़्ज़ाक़1 से हैं,
चैन की एक साँस लेना – ख़ुदा की रहमत से है,
आने वाली हर भलाई भी उसी के इकराम से है,
सबसे बड़ी नेमत ईमान भी उसी से है।
काश इस दुनिया में जानता: मैं क्या हूँ, मेरे पास क्या है?
नसीब न हो तो न आए मेरा रिज़्क़ आसमान से, न ज़मीन से,
न घास से, न गोश्त से, ग़रज़ किसी भी हाथ से।
जो मुक़द्दर है, आएगा, चाहे मेरे ख़याल में भी न हो,
रिज़्क़ मुक़द्दर से न ज़्यादा आता है, न कम।
काश इस दुनिया में जानता: मैं क्या हूँ, मेरे पास क्या है?
काली रात को दिन, दिन को शाम नहीं कर सकता,
बर्फ़ और पानी को आग, चाँदी को वुल्फ़्राम नहीं कर सकता,
ज़मीन के गोले को रोककर बिखेर नहीं सकता,
जाड़े के बर्फ़ीले बादल को नीसान का बादल नहीं कर सकता।
काश इस दुनिया में जानता: मैं क्या हूँ, मेरे पास क्या है?
जब मैं अदम में था, मेरे रब ने एक लम्हे में मुझे चुन लिया,
माँ के पेट में ही मेरी ग़िज़ा तैयार कर दी,
फ़रिश्तों को हुक्म देकर उन्हें मेरी ख़िदमत में लगा दिया,
दुनिया में लाकर मुझे अपने लिए पर्दा बना दिया।
काश इस दुनिया में जानता: मैं क्या हूँ, मेरे पास क्या है?
